Sunday, 24 May 2026

✦ साप्ताहिक संवाद सभा समाचार ✦ 24 मई 2026 (रविवार)

 ✦ साप्ताहिक संवाद सभा समाचार ✦

24  मई 2026 (रविवार)



संवाद सभा बैठक कार्यवृत्त

महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट
दिनाक: 24  मई, 2026
बैठक का माध्यम: ऑनलाइन
बैठक अवधि: साप्ताहिक रविवार विशेषांक के अंतर्गत सायं 4:00 बजे से 6:00 बजे तक (पूर्ण दो घंटे)

विषय: काव्य संगोष्ठी, साहित्य एवं सांस्कृतिक विचार में महाकवि जयशंकर प्रसाद की भूमिका।

बैठक में हुए प्रमुख वक्तव्य एवं काव्य पाठ
आज गूगल मीट के माध्यम से सभी साहित्यकार एकजुट होकर महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट एवं लिटरेचरनामा संस्था के संयुक्त तत्वावधान में बैठक आयोजित की गई। यह आयोजन 24 मई 2026 को संपन्न हुआ।
प्रारंभिक स्वागत वक्तव्य में अवधेश कुमार गुप्ता जी ने साप्ताहिक रूप में बैठक आयोजित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की।

बैठक का संचालन विशाल मालवीय जी (जो लिटरेचरनामा के प्रधान संपादक हैं) द्वारा किया गया। विनय कुमार जी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके उपरांत कविता प्रसाद ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज की युवा पीढ़ी जयशंकर प्रसाद को कठिन मानकर उनसे दूरी बना रही है, जबकि यदि उन्हें गंभीरता से समझा जाए तो वे अत्यंत सहज और सरल प्रतीत होते हैं। उन्होंने उन्हें छायावाद का प्रमुख स्तंभ बताते हुए आधुनिक युग का महाकवि कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी रचनाओं में आदिकाल के विद्यापति से लेकर रीतिकाल के घनानंद तथा रवीन्द्रनाथ टैगोर के प्रकृति-चित्रण की झलक भी दिखाई पड़ती है।

मोनिका पाठक जी ने अपने वक्तव्य के साथ कविता-पाठ प्रस्तुत किया। डॉ. सुशील कुमार पांडे ने अपनी पुस्तक “अभिज्ञान शाकुन्तल और कामायनी : तुलनात्मक संदर्भ” के माध्यम से कहा कि कामायनी की पांडुलिपियों में अनेक ऐसे छंद हैं जो अभी तक अप्रकाशित हैं। कुछ पंक्तियाँ कट चुकी हैं तथा कुछ इतनी धुंधली हो चुकी हैं कि पठनीय नहीं रहीं। उन्होंने इन पांडुलिपियों को संकलित करवाने हेतु महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया।

डॉ. ऋचा शर्मा ने जयशंकर प्रसाद को संदर्भित करते हुए कविता-पाठ किया। राजेश कुमार सिंह एवं विजय पाटील ने जयशंकर प्रसाद के नाटक, कहानी तथा छायावाद में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखे और तुलनात्मक दृष्टि से उनकी साहित्यिक विशेषताओं की चर्चा की।
रीता गौतम ने अपनी कविताओं के माध्यम से कामायनी के विभिन्न सर्गों को समेटते हुए काव्य-पाठ प्रस्तुत किया। ममता बनर्जी ने अपनी पुस्तक “छवि” के संदर्भ में कविता प्रसाद जी से संबंधित विचार साझा किए।

वरुण सिंह गौतम ने आँसू को विरह की उत्कृष्ट काव्य-रचना बताया। उन्होंने चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी एवं स्कंदगुप्त नाटकों के माध्यम से जयशंकर प्रसाद के प्रगाढ़ काव्यात्मक एवं नाटकीय पक्ष का विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसके उपरांत अंशिका तिवारी ने महाकाव्य कामायनी पर आधारित कविता-पाठ किया।

बैठक के अंतिम चरण में रतन जी ने ‘फूल’ को संदर्भित करते हुए अपनी कविता का पाठ किया। तत्पश्चात बैठक की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की गई। धन्यवाद ज्ञापन विशाल मालवीय जी द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा अन्य श्रोताओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

उपस्थित साहित्यकार एवं प्रतिभागी

मोनिका पाठक, विशाल मालवीय, रतन कुमार, ममता बनर्जी, डॉ. नरेंद्र नारायण राय, डॉ. सुशील कुमार पांडे, हिमांशु रंजन, राजेश कुमार सिंह, वरुण सिंह गौतम, सौरभ कुमार, अभय कुमार राय, विजय लक्ष्मी, चंचल कुमार, आनंद वर्मा, राहुल कुमार, विक्रांत सिंह, शम्स आलम, प्रशांत मिश्रा, अंजली कुमारी, डॉ. ऋचा शर्मा, जयवीर सिंह, लिटरेचरनामा संस्था, आशुतोष कुमार, अक्षय राज शर्मा, ममता सिंह, मीनू शर्मा, मुस्कान, साधना पांडे, विजय पाटील, विनय कुमार, डॉ. अर्जुन गुप्ता, अंकित, रूपक आर्य, रीता गौतम, प्रियंका भारती, तृषा सिन्हा, वरुण सिंह गौतम, वीरेश्वर, जयशंकर प्रसाद सिंह, रिया सत्या, अंशिका तिवारी, ज्योति कुमारी, शकीरा खातून, अभाव पासवान एवं अंकेश कुमार राय ने बैठक में अपनी सक्रिय उपस्थिति एवं सहभागिता दर्ज कराई।

निष्कर्ष
बैठक में यह भावना प्रमुख रूप से उभरकर सामने आयी कि महाकवि जयशंकर प्रसाद के साहित्य एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण को आधुनिक साहित्यिक चेतना, भारतीय संस्कृति तथा परंपरागत ज्ञान के साथ नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।
सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता के साथ भविष्य में भी साप्ताहिक बैठकों को निरंतर आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।   
         
— महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट

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