Sunday, 16 August 2026

✦ साप्ताहिक संवाद सभा समाचार ✦ 16 अगस्त 2026 (रविवार)

 ✦ साप्ताहिक संवाद सभा समाचार ✦

16 अगस्त 2026 (रविवार)


कार्यक्रम सारांशिका ( कार्यवृत्ति)

स्वतंत्रता दिवस विशेष आयोजन 🇮🇳

📚 राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद सभा तथा काव्य गोष्ठी

महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट एवं लिटरेचरनामा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष साहित्यिक आयोजन सम्पन्न हुआ।

✨ मुख्य विषय:
“प्रसाद साहित्य में राष्ट्रीय चेतना : स्वाधीनता से राष्ट्रनिर्माण तक”

उपविषय:
“इतिहास, संस्कृति, स्वाभिमान और मानवीय मूल्यों के संदर्भ में”

📅 दिनांक: 16 अगस्त 2026 (रविवार)
⏰ समय: सायं 4:00 से 6:00 बजे तक
💻 माध्यम: Google Meet ,(ऑनलाइन)

🎙️ प्रथम वक्ता-

🌟 सी.ए. शंकर घनश्यामदास अंडानी जी
संस्थापक, SAAI एंड कंपनी एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट; सामाजिक सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में सक्रिय प्रतिष्ठित व्यक्तित्व।

🌹 द्वितीय वक्ता
डॉ. आरती पाठक
विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, कालिंदी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

विशेष स्वतंत्रता दिवस विमर्श-
प्रसाद साहित्य में राष्ट्रबोध, स्वाधीनता की चेतना, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और राष्ट्रनिर्माण की भावना पर सार्थक एवं विचारोत्तेजक संवाद हुआ।

👥 आयोजक मंडल:
विशाल मालवीय | अवधेश कुमार गुप्ता | डॉ. कविता प्रसाद और डॉ. महालक्ष्मी केशरी की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.शिप्रा मिश्रा की मधुर कंठ से मां वाणी की वाणी वंदन द्वारा हुआ।


प्रथम वक्ता के रूप में सी. ए. शंकर घनश्याम अंडानी जी ने -

प्रसाद के समग्र साहित्य को केंद्र में रखते हुए विशेष तौर से उनके नाटकों और कविताओं की चर्चा की । जिसमें उन्होंने "अरुण यह मधुमय देश हमारा "और "हिमाद्रि तुंग श्रृंग से, प्रबुद्ध शुद्ध भारती" जैसी पंक्तियों का बखान करते हुए राष्ट्रीय चेतन और स्वाधीनता जैसे विषयों को केंद्र मैं रख कर अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। साथी उन्होंने प्रसाद के उपन्यासों पर भी चर्चा पर चर्चा किया। तत्पश्चात

द्वितीय वक्ता के रूप में डॉ.आरती पाठक ने -

प्रसाद के साहित्य की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए बताया कि प्रसाद जी अभाव में भी भाव की भावना से परिपूर्ण थे। वह जिस समय लिख रहे थे उनके पास उतनी सुविधा नहीं थी फिर भी उन्होंने अपने ज्ञानानुभव से हिंदी साहित्य को ऐसे बहुमूल्य साहित्यिक रत्न प्रदान किए कि जिनको सामान्य पाठक भी पढ़ ले तो 25% प्रभावित अवश्य ही हो जाएगा। उन्होंने प्रसाद के नाटक चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी सभी पर प्रकाश डालें। साथ ही हिंदी भाषा के प्रभाव को भी बताया। प्रसाद जी अपने जीवन में लालच के उद्देश्य से नहीं लिख रहे थे। उन्हें साहित्य की सेवा करनी थी और देश को जागरुक कर राष्ट्रीय चेतना का संदेश प्रदान करना था, इस भाव से वह बहुत कुछ लिख गए।


प्रश्नोत्तर सत्र-

कार्यक्रम की अगली कड़ी के रूप में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया जिसमें प्रथम प्रश्न करता रहे डॉ.कामाख्या नारायण जी..

अपने प्रश्न किया कि- "इतना उत्कृष्ट प्रसाद साहित्य रचित होते हुए भी आज तक देश प्रेम और राष्ट्र प्रेम इतना ढलान पर क्यों आ गया है?"

दूसरे प्रश्न के रूप में अवधेश गुप्ता जी ने प्रश्न रखा - "आज के कवियों को या रचनाकारों को प्रसाद जी से क्या सीखना चाहिए?"

पूछे गए प्रश्नों का उत्तर मुख्य वक्ताओं ने बड़े ही सारगर्भित ढंग से प्रसाद जी की रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। जिससे कार्यक्रम में उपस्थित सभी सहमत हो सके।


इसके साथ ही माननीय श्री साहितेंदु जी ने कालिदास, तुलसीदास और प्रसाद जी का साहित्य विवेचित करते हुए प्रसाद जी के साहित्य की महिमा का बखान किया और साथ ही प्रसाद साहित्य को इसलिए पढ़ना चाहिए क्योंकि हम अपने आप को जान सके । यह जरूरी है ऐसा उन्होंने कहा।

श्री मधुसूदन आत्मीय जी ने प्रसाद जी के साहित्य को समेटे हुए वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता की चर्चा परिचर्चा की।

इसके साथ ही अशोक कुमार गोयल जी ने अपनी कविता"हिमाद्री के श्रृंग से जो उठती पुकार आज" का काव्य पाठ किया।"

तत्पश्चात धर्म सिंह चक्रवर्ती ने अपनी कविता - " जब तक चांद में शीतलता और रुदन करने में तेज रहे।" का काव्य पाठ किया।

साथ हीआशीष जी ने अपनी कविता-'राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह की बलिदानी' का काव्य पाठ किया।

इसके बाद विनय विक्रम सिंह जी ने भी प्रसाद जी की प्रशंसा करते हुए उनकी भाषा विषयक दृष्टि पर
प्रकाश डाला।

इसी क्रम में मीनू शर्मा जी ने भी प्रसाद जी पर अपने विचार अभिव्यक्ति किए।


उपस्थित श्रोता एवं सहभागी-

कार्यक्रम में निम्नलिखित विद्वानों, साहित्यकारों , शोधार्थियों एवं सहभागियों की गरिमामयी उपस्थिति रही-

अमरजीत, अलका गुप्ता,अशोक कुमार गोयल, डॉ शिप्रा मिश्रा ,डॉ सुशील कुमार 'साहितेंदु',डॉ आरती पाठक, विनय विनोद कुमार, विनोदिनी गुप्ता, मनीष गोयल, विभा रंजन, जय प्रकाश तिवारी, मनीषा गोवाली, अंजली कुमारी, अर्चना गुप्ता ,धर्म सिंह चक्रवर्ती, प्रतिमा नलिनी, डॉ योगेंद्र कुमार, कृष्णा राम ,आशीष अंबर, रतन कुमार,पारुल भारद्वाज और सरवना केच।

कार्यक्रम का संचालन-

संपूर्ण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन डॉ. महालक्ष्मी केशरी ने किया । उन्होंने कार्यक्रम के सभी बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए एक कुशल संचालन का कार्यभार बखूबी निभाया ।


कार्यक्रम का समापन और धन्यवाद ज्ञापन-

डॉ.योगेंद्र कुमार जी ने मुख्य वक्ताओं सहित आयोजक मंडल के सदस्यों, कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, विचारकों सहित समस्त श्रोतावृंद को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम की प्रशंसा की। अंत में कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई।





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